7TH PAY COMMISSION REPORT IN THE LAST STAGE, PAY COMMISSION COULD GIVE ITS OPINION ON OROP, GOVERNMENT CAN IMPOSE STAMP ON REPORT OF PAY COMMISSION

सातवें वेतन आयोग कीं रिपोर्ट अंतिम चरण में, वन रैंक वन पेंशन पे वेतन आयोग दे सकता है अपनी राय, सरकार वेतन आयोग कीं रिपोर्ट पर अक्टूबर में लगा सकती है मोहर 




दिल्ली । वन रैंक वन पेंशन पर रक्षा मंत्रालय ने दो प्रस्ताव तैयार कर पीएमओ के भेज दिए हैं। इनमें से एक प्रस्ताव में केवल सेन्य अधिकारियों को ओआरपी योजना में शामिल करने पर साढे आठ हजार करोड़ और दूसरे में सिपाही से लेकर अधिकारियों तक सभी को शामिल करने पर 17000 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान लगाया गया है। अतिंम फैसला केबिनेट को लेना है। सरकार सातवें वेतन आयोग का इंतजार कर रही हैं ताकि एक ही बार में हिसाब-किताब किया जाए। अन्यथा वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद फिर से विसंगतिया दिरवनी शुरू हो जाएगी ।दिल्ली के जंतर-मंतर पर करीब दो महीने से अनशन पर बैठे पूर्व सेनिकों को हटाने की कार्रवाई के बाद वन रैंक वन पेंशन का मामला गरमा गया है। प्रधानमंत्री मोदी मन के बात कार्यक्रम में भी इस योजना को हर हाल में लागू करने की बात कह चुके हैं। 15 अगस्त के मौके पर लालकिला के प्राचीर से भी वह इस मुदे पर कुछ बोलेंगे।

रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार मंत्रालय ने दो प्रस्ताव भेजे हैं। इनमें से जो भी सरकार को अच्छा लगे उसे वह लागू कर सकती है। सरकार सिपाहियों को छोड़कर इस योजना को लागू नहीं करना चाहती है, इसलिए सरकार का खर्चा बहेगा । अगले साल पहले जनवरी से वेतन आयोग कीं सिफारिशें भी लागू होनी है। सरकार चाहती है कि दोनों काम एक साथ हो जाए। अन्यथा सरकार पर बार बार पेंशन बढाने का दबाव बढेगा। गौरतलब है कि सातवें वेतन आयोग के रिपीर्ट अंतिम चरण में है। इसी महीने सरकार को यह सौंपी जानी है। अक्टूबर में सरकार इस रिपोर्ट को लागू करने की सहमति देगी। रिपोर्ट जनवरी से लागू होगी। सरकारमे बैठे वरिष्ट अधिकारियो के अनुसार यदि अभी पूर्व सैनिको को वन रेंक वन पेंशन दी गई तो सरकार के कर्मचारी मायूस होंगे और जब 7वे वेतन आयोग की रिपोर्ट लागु होगी तो फिर से पूर्व सैनिको को लाभ देना पड़ेगा। इसलिए क्यों न दोनों रिपोर्ट एक साथ लागु की जाए, ताकि दोनों वगेरे को लाभ मिले। पूर्व सैनिको को वन रेंक वन पेंशन देने के रास्ते में अनेक बाधाए सामने आ रही है। पहले तो सेना के भीतर ही विरोध के सुर पनपे। सैनिक हर स्तर पर वरिष्टता का ध्यान रखते है, पेंशन में भी यही हो रहा था। वरिष्टता और कनिस्टता के चक्कर में पेंशन फिक्स नहीं हो पा रही थी। रक्षा मंत्री के दखल के बाद पेंशन फिक्स हुई है।

सूत्रों का कहना है की वन रेंक वन पेंशन पर करीब 17000 करोड़ रूपये का खर्च आ रहा है। पूर्व सैनिको को 2014 से इसका लाभ दिया जाना है। लेकिन अब नौकरशाह और अर्ध सैनिक बल भी वन रेंक वन पेंशन की मांग करने लगे है। इससे सरकार के लिए नयी परेशानी खड़ी हो गई है। सूत्रों के अनुसार, आईइएस अधिकारियो का तर्क है की ऐसी ही समरया उनकी सर्विस में भी है, इसलिए उन्हें भी वन रैंक वन पेंशन दिया जाएगा। हालांकि सरकार इस तरह की व्यवस्था कर रहीं है ताकि वन रैंक वन पेंशन केवल सशस्त्र सेनिकों के लिए हो। इसका नाम ही मिलिट्री पेंशन होगा। उधर, अर्धसैनिक बलों ने भी गृहमंत्रालय से वन रैंक वन पेंशन देने कीं मांग कीं है। उन्होंने अपनी सेवा की तुलना सेना की सेवा से की है। चुनाव से पूर्व यूपीए सरकार ने उनकी मांग स्वीकार करते हुए अंतरिम बजट में 500 करोड़ रुपये का प्रावधान भी कर दिया था। लेकिन वास्तव में बस दिशा में काम नहीं हुआ था। भाजपा ने भी लोकसभा चुनाव में वन रेक वन पेंशन को बडा मुद्दा बनाया था।

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